expr:class='"loading" + data:blog.mobileClass'>

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

वैवाहिक समस्या निवारण

 वैवाहिक समस्या निवारण

मङ्गल चण्डिका स्तोत्र
      यह मङ्गल चण्डिका पाठ देवी भागवत से लिया गया है। यदि किसी स्त्री का पति के साथ झगड़ा-झंझट हो रहा हो या अलगाव जैसी स्थिति उत्पन्न हो या लड़की की विवाह निश्चित करने में देर हो रहा हो तथा अत्यधिक कठिनाई आ रही हो,तो उस स्त्री या लड़की को  मङ्गल चण्डिका स्तोत्र का पाठ मङ्गलवार को आठ बार स्वतः पढ़ना चाहिए या श्रवण करना चाहिए।
       पढ़ने या श्रवण करने से पूर्व दुर्गाजी के फोटो पर लाल पूजा सामग्री -लाल फूल, लाल अक्षत, लाल चन्दन, लाल रोली, सिन्दूर, लाल कपड़ा, लाल कपड़े की बाती के दीपक से पूजा करना चाहिए। पाठ करने तक लाल कपड़े की बत्ती का दीपक घी का जलाना चाहिए। पाठ श्रवण कर अपनी सौभाग्य प्राप्ति की शीघ्र कामना करनी चाहिए।इसका फल बड़ा ही उत्तम है। बहुत सी स्त्रियों तथा लड़कियों को यह व्रत करने से  उन्हें शीघ्र लाभ हुआ है। पाठ करने के पहले दाहिने हाथ में अक्षत,जल,फूल लेकर संकल्प करते हुए जल को भूमि पर छोड़ देना चाहिए तथा पाठ को पढना या श्रवण करना चाहिए।
ध्यान-
 देविं षोडसवर्षीयां शास्वतसुस्थिर  यौवनम् । 
बिम्बोष्टिं शुचतिं सुधां शरद् पद्य निभाननाम् । 
श्वेत चम्पक वर्णाभां   सुनिलोत्पल लोचनाम् । 
जगद् धात्रिं च दात्रिं च सर्वेभ्यःसर्वसभ्यदाम् । 
संसार सागरे  घोरे   ज्योति रूपां  सदा  भजे ।
देव्याश्च  ध्यान्    नित्येयं    स्तवनं श्रूयतां मुने।
स्तोत्र-
रक्ष रक्ष जगन्मति देवि मङ्गल चण्डिके।
 हारिके विपदां रार्शे हर्ष मङ्गल कारिके। 
हर्ष मङ्गल दक्षे च हर्ष मङ्गल दायिके। 
शुभे मङ्गल दक्षे च शुभे मङ्गल चण्डिके। 
शुभे मङ्गले मङ्गलार्हे च सर्व मङ्गल मङ्गले।
सतां मङ्गलदे देवि सर्वेषां मङ्गलालये। 
पूज्ये मङ्गलवारस्य च मङ्गलाभिष्ट देवते ।
पूज्ये मङ्गल भूपस्य मनुवंशस्य संततम् ।
मङ्गल अधिष्ठात्रि देवि मङ्गलानाश्च मङ्गले
संसारे मङ्गलाधारे मोक्ष मङ्गलदायिनी।
सारे च मङ्गलाधारे पारे च सर्व कर्मणाम् ।
प्रति मङ्गलावारे च पूज्ये मङ्गल शुभप्रदे।
स्तोस्त्रेण अनेन शम्भुश्च श्रूयतां मङ्गलचण्डिकाम् ।
प्रति मङ्गलवारे च पूजां दत्वा गतः शिवः ।
प्रथमे पूजिता देवोः शिवेन सर्व मङ्गला
द्वितीये पूजिता सा च मङ्गलेन् ग्रहेण च ।
तृतीये पूजिता भद्रा मङ्गलेन नृपेण ध।
चतुर्थे मङ्गलवारे सुन्दरिभिः सुपूजिता ।
पंचमे मङ्गलाकांक्षी नरैः मङ्गलचण्डिका ।
पूजिता प्रतिविश्वेसु विश्वेश पूजिता सदा ।
ततः सर्वत्र सम्पूज्य वभूव परमेश्वरी ।
देवैश्च मुनिभिः चैव मानवै: मुनिभिः मुने ।
देव्याश्च मङ्गलस्तोत्रम् यः शृणोति समाहिता ।
तद् मङ्गलम् भवेत् तस्य न भवेद् अमङ्गला ।
वर्धते पुत्र पौत्रेश्च मङ्गलं च दिने-दिने ।
मन्त्र-
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्व पूज्ये देवि मङ्गलचण्डिके हूँ हूँ फट् स्वाहा ।
   उक्त स्तोत्र का पाठ श्रवण प्रति मङ्गलवार को आठ बार करें। उसके बार ही सात्विक मीठा भोजन करें। कम से कम लगातार चार मङ्गलवार को यह स्तोत्र श्रवण करना चाहिए।अन्तिम मङ्गलवार को गुड़ घी मिलाकर 108 बार “ॐ मङ्गल चण्डिका देव्यै नमः स्वाहा" मन्त्र से हवन कर देना चाहिए। किसी स्त्री का पति से झगड़ा-झंझट तथा अन्य विवाह संबंधी समस्या एवं लड़कियों की शीघ्र विवाह के लिए यह स्तोत्र रामबाण है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें