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रविवार, 17 अप्रैल 2022

कुल देवी माता बन्दी देवी की उपासना


 कुल देवी माता बन्दी देवी की उपासना

॥साधन-सज्जा॥
पूजा स्थल को पवित्र करना चाहिए तथा पूजन सामग्री को सजाना चाहिए।
॥दर्भ या पवित्री धारण॥
दोनों अनामिकाओं में पवित्री धारण करना चाहिए-
प्रार्थना-
विरञ्चिना    सहोत्पन्न     परमेष्ठि    निसर्जन।
नुद सर्वाणि पापानि दर्भ! स्वस्तिकारो भव ॥
धारण-दो पवित्री दाहिने हाथ तथा तीन पवित्री बाएँ हाथ की अनामिका में धारण करना चाहिए-
ॐ पवित्रेस्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः। 
तस्य ते पवित्रपते पवित्रपूतस्य यत्कामः पुनःतच्छकेयम् ।        
॥शिखाबन्धन॥
दाहिने हाथ की अँगुलियों को गीला कर शिखा स्थान का स्पर्श करना चाहिए।मन्त्र बोलने के बाद शिखा में ऐसी 
गाँठ लगानी चाहिए,जो सिरा खींचने से खुल जाय,इसे आधी गाँठ कहते हैं। 
ॐ चिरूपिणि महामाये, दिव्यतेजः समन्विते ।
तिष्ठ देवि शिखामध्ये, तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे ॥ 
॥चन्दनधारण॥
मन्त्र पढते हुए पहले बन्दी माता को चन्दन लगाना चाहिए,तत्पश्चात् स्वयं के आज्ञा चक्र पर चन्दन लगाना चाहिए-
चन्दनस्य महत्पुण्यं, पवित्रे पापनाशनम् ।
आपदां हरते नित्यं, लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥
कांति लक्ष्मी श्रुति सौख्ये सौभाग्यमतुलं ममः ।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम् ॥
केशवानन्त गोविन्द वाराह पुरुषोतमं ।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं में प्रसीदतु ॥
॥आचमन॥ 
जल भरे पात्र में से दाहिने हाथ की हथेली पर जल लेकर तीन बार आचमन करना चाहिए।आचमन के समय 
आचमन मंत्र पढ़ना चाहिए-
ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा ॥१॥
ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा ||२|| 
ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि,श्रीः श्रयतां स्वाहा ॥३॥
॥मार्जन॥
पहले विनियोग पढ़ लेना चाहिए,तब जल छिड़कना या मार्जन करना चाहिए -
विनियोग-ॐ अपवित्रः पवित्रो वेत्यस्य वामदेव ऋषिः, विष्णुर्देवता गायत्रीच्छन्दः हृदि पवित्रकरणे
विनियोगः ।
इस प्रकार विनियोग पढ़कर जल छोड़े' तथा निम्नलिखित मन्त्रसे मार्जन करे (शरीर एवं सामग्रीपर जल छिड़के)-
मन्त्र- 
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।         
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
॥पृथ्वी पूजन॥
ॐ पृथ्वीति मन्त्रस्य मेरुपृष्ठ ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मो देवता आसन पवित्रकरणे विनियोगः।
धरती माँ को हाथ से स्पर्श करके मन्त्र बोलते हुए नमस्कार करना चाहिए-
ॐ पृथ्वि! त्वया धृता लोका,देवि! त्वं विष्णुना धृता ।
त्वं च धारय मां देवि ! पवित्रं कुरु चासनम् ॥
॥सङ्कल्प॥
सङ्कल्प बोलने के पूर्व गोत्र,मास,तिथि तथा वार की जानकारी कर लेनी चाहिए।इनका प्रयोग करते हुए सङ्कल्प 
बोलना चाहिए-
ॐ विष्णवे नमः,ॐ विष्णवे नमः,ॐ विष्णवे नमः।ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वत 
मन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे बौद्धावतारे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे..............क्षेत्रे 
नगरे पक्षे...........ग्रामे ............नाम-संवत्सरे....... मासे (शुक्ल/कृष्ण)पक्षे.............तिथौ...... वासरे....... गोत्र: शर्मा/
वर्मा/गुप्तोऽहम् प्रातः (मध्याह्ने, सायं) सर्वकर्मसु शुद्ध्यर्थं श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं श्री भगवत्प्रीत्यर्थं च 
कुलदेवी माता बन्दीपूजनं  करिष्ये।
॥घण्टी वादन॥
मन्त्र पढते हुए घण्टी बजाना चाहिए-
आगमार्थं तु देवानां गमनार्थंच रक्षसाम् ।
कुरु घण्टे वरं नादं देवतास्थान संनिधौ।।                
घण्टीस्थिताय गरुडाय नमः।
॥दीप ज्वालन॥
दीपो ज्योतिपरमब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं सान्ध्य दीप नमोऽस्तुते ॥
शुभं करोतु कल्याणम् आरोग्यं सुख सम्पदम् ।
शत्रु बुद्धि विनाशं च दीपो ज्योतिर्नमोऽस्तुते ।।
भो दोप! देवरूपस्त्वं कर्मसाक्षी ह्यविघ्नकृत।
यावत् कर्म समाप्तिः स्यात् तावत् त्वं सुस्थिरो भव ॥
त्वं ज्योतिस्त्वं रविश्चन्द्रो विद्युदग्निश्च तारकाः।
सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः॥
ॐअग्निज्योतिज्योतिरग्निः स्वाहा।
सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा।
अग्निर्वच्चो ज्योतिर्वर्च्च: स्वाहा।
सूर्यो वर्च्चो ज्योतिर्वच्चः स्वाहा।
ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा।
॥कलश स्थापन॥
वरुण नमन एवं आवाहन-
ॐवरुणाय नमः।आवाहयामि।स्थापयामि।ध्यायामि।ततो नमस्कारं करोमि।
तीर्थों का आवाहन-
कलश में जल भरते हुए मन्त्र पढें-
सर्वे समुद्राःसरितस्तीर्थानि जलदा नदाः ।
आयान्तु  देवपूजार्थं दुरितं क्षयकारकाः ॥
गङ्गे च  यमुने   चैव  गोदावरी सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सनिधिं कुरु॥
कलशस्थ देवताओं को नमन एवं आवाहन-
कलश को स्पर्श करते हुए मन्त्र पढें-
ॐकलशस्थ देवताभ्यो नमः।आवाह्यामि।स्थापयामि।ध्यायामि।ततो नमस्कारं करोमि।
त्वत्प्रसादादिमं यज्ञं कर्तुमीहे जलोदभवः।
सान्निध्यं कुरु मे देव प्रसन्नो भव सर्वदा॥
॥गुरु  नमन
ॐ नमः शिवाय गुरवे सच्चिदानन्दमूर्तये।
निष्प्रपंचाय शान्ताय निरालम्बाय तेजसे ॥
॥सर्वदेव नमन॥
श्री मन्महागणाधिपतये नमः। लक्ष्मी नारायणाभ्यां नमः। उमामहेश्वराभ्यां नमः ।वाणी हिरण्यगर्भाभ्यां नमः। शचीपुरन्दराभ्यां नमः । माता पितृचरण कमलेभ्यो नमः।इष्ट देवताभ्यो नमः। कुलदेवताभ्यो नमः। ग्राम देवताभ्योः नमः। स्थान देवताभ्यो नमः। वास्तुदेवताभ्यो नमः।सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नमः।एतत् कर्म प्रधान कुल देवौ बन्दी देव्यै नम:।
सतोय पाथोद समान कान्तिम्,अम्भोज पीयूषकरी हस्ताम्।
सुराङ्गना सेवित पाद पद्माम् भजामि, बन्दीं भव-बन्ध मुक्तये ।।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।आवाहयामि,स्थापयामि,ध्यायामि।ततो नमस्कारं करोमि। 
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।हस्तयोःअर्ध्यं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।आचमनीयं जलं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।स्नानीयं जलं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।सौभाग्यसूत्रं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।गन्धं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।चन्दनं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।पुष्पं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।विल्वपत्राणि समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।धूपं आघ्रापयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।दीपं दर्शयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।नैवेद्यं निवेदयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।आचमनीयं जलं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।पूगीफलं समर्पयामि।
(इसके बाद बन्दी मोचन स्तोत्र का पाठ करना।)
बन्दी मोचन स्तोत्रम्-
ॐ बन्दी देव्यै नममस्कृत्य वरदाभय शोभिनीम्।
तदग्रयां शरणं गच्छे शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
त्वं बन्दी कमल पत्राक्षी लौह शृंखला भञ्जिनीम्।
प्रसादं कुरु मे देवि!रजनी चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
त्वं बन्दी त्वं महामाया,त्वं दुर्गा त्वं सरस्वती ।
त्वं देवी रजनी चैव, शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
संसार तारिणी बन्दी सर्वकाम प्रदायिनी।
सर्व लोकेश्वरी देवि! शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
त्वं ह्रीं त्वमीश्वरी देवी ब्रह्माणी ब्रह्म वादिनी ।
त्वं वै कल्प-क्षय कर्त्रीं शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
देवी धात्री धरित्री च धर्मशास्त्रार्थ भाषिणी ।
दुःश्वासाम्ब रागिनी देवि,शीघ्र मेोचं ददातु मे ॥
नमोऽस्तुते महालक्ष्मी रत्नकुण्ड भूषिते ।
शिवस्यार्धाङ्गिनी चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
नमस्कृत्य महादुर्गा भयात्तु तीरिणीं शिवाम् ।
महादुखहरां   चैव,   शीघ्रं मोचं ददातु   मे ॥
इदं स्तोत्र महापुण्य यः पठेन्नित्यमेव    च ।
सर्वबन्धविनिमुक्तो मोक्षं च लभते क्षणात् ॥
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।स्तवपाठं समर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।तर्पयामि।
ॐ कुल देव्यै बन्दी देव्यै नम:।नमस्कारान् समर्पयामि।
बन्दी मोचन मन्त्र-
विनियोग- ॐ अस्य श्री बन्दी मोचन मन्त्रस्य,श्री कण्व ऋषिःत्रिष्टुप् छन्दः श्री बन्दी देवता ह्री बीजं ह्रूं कीलकं कुल देवी
माता बन्दी प्रीतये न्यासे जपे च विनियोगः ।
ऋष्यादिन्यास- ॐकण्व ऋषये नमः शिरसि,त्रिष्टुप छन्दसे नमःमुखे,श्री बन्दी देव्यै नमः हृदि, ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये,ह्रूं शक्त्यै नमः पादौ, ऊँ बन्दी देव्यै कीलकाय नमः सर्वाङ्गे।
     ''ॐ ह्रीं हूं बन्दी देव्यै नमः'' से हाथ शुद्धि ।
करन्यास- ॐ अंगुष्ठाभ्यां नमः।ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः। ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः । ॐ बन्दी अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ देव्यै कनिष्ठिकाभ्यां नमः।ॐ नमः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
हृदयादि न्यास-ॐ हृदयाय नमः। ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ ह्रूं शिखायै वषट्।ॐ बन्दी कवचाय हुम्।ॐ देव्यै नेत्र त्रयाय वौषट्।ॐनमः अस्त्राय फट्।
ध्यान-
सतोय पाथोद समान कान्तिम्,अम्भोज पीयूषकरी हस्ताम्।
सुराङ्गना सेवित पाद पद्माम् भजामि, बन्दीं भव-बन्ध मुक्तये ।।
ॐ कुल देवौ बन्दी देव्यै नम:।आवाहयामि,स्थापयामि,ध्यायामि।ततोनमस्कारं करोमि।
मन्त्र-ॐ ह्रीं ह्रूं बन्दी देव्यै नमः।
हवन विधि-कमलगट्टा,गाय के घी,शहद,हल्दी एवं लाल चन्दन के चूर्ण को मिलाकर जप संख्या का दशांश हवन।
हवन मन्त्र-ॐ ह्रीं ह्रूं बन्दी देव्यै नमःस्वाहा।इदं बन्दी देव्यै इदं न मम।

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