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मंगलवार, 2 जून 2026

वामपंथी इतिहासकारों की करतूत

बाबर ने मुश्किल से कोई 4 वर्ष राज किया। हुमायूं को ठोक पीटकर भगा दिया। मुग़ल साम्राज्य की नींव अकबर ने डाली और जहाँगीर, शाहजहाँ से होते हुए औरंगजेब आते आते उखड़ गया।
कुल 100 वर्ष (अकबर 1556ई. से औरंगजेब 1658ई. तक) के समय के स्थिर शासन को मुग़ल काल नाम से इतिहास में एक पूरे पार्ट की तरह पढ़ाया जाता है। मानो सृष्टि आरम्भ से आजतक के कालखण्ड में तीन भाग कर बीच के मध्यकाल तक इन्हीं का राज रहा।
अब इस स्थिर (?) शासन की तीन चार पीढ़ी के लिए कई किताबें, पाठ्यक्रम, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न, विज्ञापनों में गीत। इतना हल्ला मचा रखा है, मानो पूरा मध्ययुग इन्हीं 100 वर्षों के इर्द गिर्द ही है। जबकि उक्त समय में मेवाड़ इनके पास नहीं था। दक्षिण और पूर्व भी एक सपना ही था।
अब जरा विचार करें कि क्या भारत में अन्य तीन चार पीढ़ी और 
शताधिक वर्ष पर्यन्त राज्य करने वाले वंशों को इतना महत्त्व या स्थान मिला है ?

अकेला विजयनगर साम्राज्य ही 300 वर्ष तक टिका रहा। हीरे माणिक्य की हम्पी नगर में मण्डियां लगती थीं। महाभारत युद्ध के बाद 1006 वर्ष तक जरासन्ध वंश के 22 राजाओं ने किया। 5 प्रद्योत वंश के राजाओं ने 138 वर्ष , 10 शैशुनागों ने 360 वर्षों तक , 9 नन्दों ने 100 वर्षों तक , 12 मौर्यों ने 316 वर्ष तक , 10 शुंगों ने 300 वर्ष तक , 4 कण्वों ने 85 वर्षों तक , 33 आंध्रों ने 506 वर्ष तक , 7 गुप्तों ने 245 वर्ष तक राज्य किया । फिर विक्रमादित्य ने 100 वर्षों तक राज्य किया था । इतने महान् सम्राट होने पर भी भारत के इतिहास में गुमनाम कर दिए गए।

उनका वर्णन करते समय इतिहासकारों को मुँह का कैंसर हो जाता है। सामान्य ज्ञान की किताबों में पन्ने कम पड़ जाते है। पाठ्यक्रम के पृष्ठ सिकुड़ जाते है। कोचिंग वालों की नानी मर जाती है। प्रतियोगी परीक्षकों के हृदय पर हल चल जाते हैं।

वामपंथी इतिहासकारों ने नेहरूवाद का मल भक्षण कर, जो उल्टियाँ की उसे ज्ञान समझ चाटने वाले चाटुकारों, तुम्हे धिक्कार है।

यह सब कैसे और किस उद्देश्य से किया गया ये अभी तक हम ठीक से समझ नहीं पाए हैं और ना हम समझने का प्रयास कर रहे हैं।

शुक्रवार, 27 मार्च 2026

शमशान की चिताओं के कोयले से बन रही हैं अगरबत्तियां

शमशान की चिताओं के कोयले से बन रही हैं अगरबत्तियां

1000 करोड़ रुपये का कारोबार, कई राज्यों में होती है सप्लाई

एजेंटों ने कहा: खुशबू से हड्डियों की बदबू का पता नहीं चलता

सिटी न्यूज़ बिहार

बिहार में हुआ यह खुलासा बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें यह बात सामने आई है कि शमशान की चिताओं से निकले कोयले का इस्तेमाल अगरबत्तियां बनाने में किया जा रहा है।

चिताओं पर इंसानी हड्डियां जलकर कोयला बन जाती हैं और यह कोयला राख में इस हद तक मिल जाता है कि राख में हड्डियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। एजेंटों के मुताबिक, शमशानों में हर चीज़ बिक जाती है; इसमें से बड़े कोयले के टुकड़े होटलों में खाना पकाने के लिए भेजे जाते हैं, जबकि बारीक कोयला और उसका पाउडर अगरबत्ती बनाने वाली फैक्ट्रियों में भेजा जाता है।

हैरानी की बात यह है कि बिहार की कुछ बड़ी फैक्ट्रियां भी इसी कोयले से अगरबत्तियां बना रही हैं, और यहाँ बनी अगरबत्तियां देश के पाँच अन्य राज्यों में भी सप्लाई की जाती हैं। इन अगरबत्तियों में गुलाब, केवड़ा या चंदन जैसी खुशबूदार चीज़ें मिलाई जाती हैं, ताकि कोई भी अगरबत्ती के अंदर मौजूद हड्डियों के पाउडर या कोयले की बदबू को पहचान न सके।

देश में अगरबत्तियों का सालाना कारोबार 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें से अकेले बिहार का हिस्सा 800 से 1,500 करोड़ रुपये का है। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब भास्कर की टीम ने पटना, गया, नालंदा और वैशाली समेत 12 जिलों में होटल मैनेजर और फैक्ट्री मालिकों का भेष बनाकर पड़ताल की। ​​पटना के बांस घाट पर...

एजेंटों ने यह बात कबूल की कि अगरबत्तियां बनाने के लिए जिस चारकोल पाउडर का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है, वह शमशान का कोयला ही होता है, क्योंकि यह बहुत सस्ता पड़ता है। जब रिपोर्टर ने हड्डियों के बारे में पूछा, तो एजेंटों ने साफ-साफ कहा कि मशीन में कोयला पीसते समय हड्डियां भी साथ में पिसकर पाउडर बन जाती हैं, और बाद में खुशबू मिला देने पर कोई भी उन्हें पहचान नहीं पाता। गयाजी में विष्णुपाद मंदिर के पास स्थित शमशान घाट पर भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जहाँ एजेंटों की एक पूरी टीम चिता जलने के बाद उसमें से कोयला निकालने के काम में जुटी रहती है। एजेंट अखिलेश ने बताया कि उनकी टीम में 12 लोग हैं, जो कोयला निकालने से लेकर उसकी सप्लाई करने तक का सारा काम संभालते हैं। यहाँ तक कि अगरबत्ती बनाने वाली फैक्ट्रियों के मालिक भी यह बात मानते हैं कि अगरबत्ती के काले हिस्से को बनाने के लिए वे सिर्फ शमशान के कोयले का ही ऑर्डर देते हैं। इस कोयले को एक खास मशीन में इतने ज़्यादा दबाव के साथ पीसा जाता है कि यह बिल्कुल बारीक पाउडर बन जाता है। आपूर्तिकर्ता इस पाउडर को लगभग 17 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं, जो लोगों की आस्था और स्वास्थ्य, दोनों का गंभीर उल्लंघन है।

रविवार, 1 मार्च 2026

🎼 1️⃣ स्टाफ (पाँच रेखाएँ) के ऊपर लिखे अक्षर
स्टाफ के ऊपर जो अक्षर (जैसे Am, Gm, C, Em आदि) लिखे होते हैं, वे Chords (कॉर्ड्स) होते हैं।
ये गिटार या हार्मोनियम पर बजाने के लिए दिए जाते हैं।
यदि दो पंक्तियों में कॉर्ड्स लिखे हों —
ऊपर वाली पंक्ति = गिटार के लिए
नीचे वाली पंक्ति = हार्मोनियम के लिए
👉 मतलब — ये अक्षर संगत (accompaniment) के लिए हैं, मुख्य धुन के लिए नहीं।
🎵 2️⃣ Drone (ड्रोन) का संकेत
यदि किसी स्वर को एक आयताकार बॉक्स (rectangle) में दिखाया गया है, तो वह ड्रोन स्वर है।
यह सामान्यतः गीत की शुरुआत में दिया जाता है।
इसे पूरे गीत के दौरान लगातार बजाया जा सकता है।
विशेष रूप से हार्मोनियम में यह उपयोगी है।
👉 भारतीय संगीत में इसे “तानपुरे की निरंतर ध्वनि” जैसा समझ सकते हैं।
🎶 3️⃣ स्टाफ पर लिखे गोल चिन्ह (नोट्स)
पाँच रेखाओं पर जो गोल बिंदु बने हैं, वही मुख्य धुन (melody) के स्वर हैं।
नीचे लिखे अक्षर (C, D, Eb आदि) उन स्वरों के नाम बताते हैं।
ये अक्षर उन लोगों की सहायता के लिए लिखे गए हैं जिन्हें स्टाफ पढ़ना कठिन लगता है।
👉 उदाहरण:
C = सा
D = रे
Eb = कोमल ग
आदि।
🎼 4️⃣ मध्य C (Middle C) का संकेत
यदि किसी नोट के पास छोटा “1” लिखा है, तो वह Middle C (मध्य सा) को दर्शाता है।
यदि नोट उसके ऊपर है, तो वह ऊँचा स्वर है।
यदि नीचे है, तो नीचा स्वर है।
👉 यानी 1 का चिह्न यह बताता है कि स्वर मध्य सा के ऊपर है या नीचे।
🎸 5️⃣ कॉर्ड्स (Chords) का अर्थ
उदाहरण के रूप में:
Am = A minor
Gm = G minor
Cm = C minor
Em = E minor
इनका अर्थ है — मुख्य धुन के साथ एक से अधिक स्वर मिलाकर बजाना।
भारतीय संगीत में इसे “समवेत स्वर संगति” जैसा समझ सकते हैं।
📖 सारांश
ऊपर लिखे अक्षर = कॉर्ड (संगत के लिए)।
बॉक्स में स्वर = ड्रोन (लगातार पृष्ठभूमि स्वर)।
स्टाफ पर गोल चिन्ह = मुख्य धुन।
नीचे लिखे अक्षर = स्वर का नाम।
1 का चिन्ह = मध्य C का संकेत।
शुरुआती विद्यार्थियों के लिए निर्देश
पुस्तक में लिखा है—
यदि आप कीबोर्ड (हार्मोनियम) सीखने में बिल्कुल नए हैं और ड्रोन (लगातार पृष्ठभूमि स्वर) बजाने में कठिनाई हो रही है, तो पहले बिना ड्रोन के केवल धुन (melody) सीखें।
जब आप उँगलियों की गति और नोट पढ़ने में सहज हो जाएँ, तब भविष्य में ड्रोन जोड़ सकते हैं।
👉 अर्थ: पहले सरल अभ्यास करें, फिर जटिलता बढ़ाएँ।
🎼 2️⃣ The Use of Chords on Harmoniums
(हार्मोनियम पर कॉर्ड्स का उपयोग)
धुन के ऊपर अक्सर कॉर्ड के चिन्ह (जैसे Bm आदि) लिखे होते हैं।
यदि आप हार्मोनियम बजा रहे हैं, तो इन कॉर्ड्स को धुन के साथ बजा सकते हैं।
विशेष रूप से तब उपयोगी है जब:
गिटार भी साथ में बज रहा हो।
ड्रोन स्वर गिटार के कॉर्ड से टकरा रहे हों।
महत्वपूर्ण बात:
गिटार के साथ बजाते समय कभी-कभी ड्रोन स्वर कॉर्ड से मेल नहीं खाते।
ऐसी स्थिति में:
या तो ड्रोन छोड़ दें,
या केवल मुख्य धुन ही बजाएँ।
👉 मतलब — संगीत में संतुलन आवश्यक है।
🕉 स्वामी क्रियानंद का विचार
पुस्तक में स्वामी क्रियानंद का उद्धरण है:
“धुन (Melody) ही सबसे महत्वपूर्ण है।”
जो लोग कॉर्ड्स को आसान मानते हैं और धुन छोड़ देते हैं, वे मूल भावना खो सकते हैं।
केवल कॉर्ड्स बजाना पर्याप्त नहीं है।
धुन सीखना और सही ढंग से गाना आवश्यक है।
जब साधक भजन में गहराई तक उतरता है, तो धीरे-धीरे कॉर्ड्स कम करके केवल धुन पर केंद्रित होना चाहिए।
👉 गहरा आध्यात्मिक अनुभव बाहरी सजावट से नहीं, बल्कि सरल और शुद्ध धुन से आता है।
🎸 3️⃣ Other Instruments (अन्य वाद्य यंत्र)
गिटार भजन में उत्साह और ऊर्जा ला सकता है।
यदि अधिक ज़ोर से न बजाया जाए तो यह अच्छा सहायक वाद्य है।
प्रारंभ में हल्की स्ट्रमिंग (Strumming) ठीक है।
जैसे-जैसे भजन गहरा होता जाए, बाहरी उत्साह कम करके आंतरिक शांति की ओर बढ़ना चाहिए।
👉 बाहरी आनंद से आंतरिक ध्यान की ओर यात्रा।
🌼 सारांश
✔ नए विद्यार्थी पहले केवल धुन सीखें।
✔ कॉर्ड्स सहायक हैं, पर मुख्य नहीं।
✔ ड्रोन और कॉर्ड्स का संतुलन रखें।
✔ धुन (Melody) ही भजन का हृदय है।
✔ अंततः संगीत का उद्देश्य आंतरिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव है।
गिटार के बारे में निर्देश
गिटार बजाते समय ताल (Downbeat) को बहुत अधिक ज़ोर से न उभारें।
यदि ताल पर ज़ोर अधिक होगा तो संगीत में भारीपन आ सकता है।
हल्का और संतुलित स्ट्रमिंग (strumming) भजन को अधिक मधुर और uplifting (उत्थानकारी) बनाती है।
ऊर्जावान (energetic) भजन भी भारी लय के बिना बजाए जा सकते हैं।
👉 उद्देश्य: लय प्रेरक हो, पर ध्यान भटकाने वाली न हो।
🥁 2️⃣ कीर्तन और ड्रम (Kirals and Drums)
ड्रम और अन्य ताल वाद्य मुख्य धुन (melody) के सहयोगी के रूप में उपयोग करें।
गायक और अन्य वादकों के पास बैठें ताकि ताल मेल में रहे।
ड्रम का काम है — लय बनाए रखना, धुन को दबाना नहीं।
महत्वपूर्ण सुझाव:
कीर्तन में ताल वाद्य आसानी से अधिक प्रभावी (overpower) हो सकते हैं।
उत्साहपूर्ण भजनों में उपयोग करें, परंतु गहरे, ध्यानात्मक भजनों में कम प्रयोग करें।
तबला के बारे में:
तबला सुंदर वाद्य है, पर अच्छी तरह बजाना कठिन है।
यदि सही ढंग से न बजाया जाए तो धुन से प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
मृदंग या ढोलक सरल और अधिक संतुलित विकल्प हो सकते हैं।
सरल लय रखें।
👉 सिद्धांत: ताल सहायक हो, प्रधान नहीं।
🎶 3️⃣ अन्य मधुर वाद्य (Other Melody Instruments)
जो वाद्य उपलब्ध हों, उनका उपयोग कर सकते हैं।
पर ध्यान रखें कि धुन या भक्ति-भाव दब न जाए।
भजन का मुख्य तत्व धुन (Melody) है।
वाद्य केवल गहराई बढ़ाने के लिए हैं।
उदाहरण:
बांसुरी (Flute)
वायलिन (Violin)
सेलो (Cello)
हार्प (Harp)
ये विशेष अवसरों पर समूह गान में अच्छे लगते हैं।
📚 4️⃣ अतिरिक्त अध्ययन सामग्री
पियानो कॉर्ड्स और उनके विभिन्न रूपों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है।
हार्मोनियम वादकों के लिए अलग चार्ट भी दिए गए हैं।
समूह गान और भारतीय भजनों के लिए परिशिष्ट (Appendix) देखने का सुझाव दिया गया है।
🌼 मुख्य संदेश
✔ धुन (Melody) सबसे महत्वपूर्ण है।
✔ ताल और वाद्य सहयोगी हैं, मुख्य नहीं।
✔ संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
✔ सरलता से गहराई की ओर बढ़ना ही भजन का उद्देश्य है।
1️⃣ Sharp (#) का चित्र
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सफेद कुंजियाँ:
| C | D | E | F | G | A | B | C |

बीच की काली कुंजियाँ (Sharp):
   C# D# F# G# A#
या क्रम से —
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C → C# → D → D# → E
F → F# → G → G# → A → A# → B
👉 Sharp (#) का अर्थ है —
दिए गए स्वर से आधा सुर ऊपर की काली कुंजी बजाना।
उदाहरण:
C# = C के ठीक दाहिने वाली काली कुंजी
F# = F के दाहिने वाली काली कुंजी
🎹 2️⃣ Flat (♭) का चित्र
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सफेद कुंजियाँ:
| C | D | E | F | G | A | B | C |

बीच की काली कुंजियाँ (Flat):
   Db Eb Gb Ab Bb
या क्रम से —
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D → Db → C
E → Eb → D
G → Gb → F
A → Ab → G
B → Bb → A
👉 Flat (♭) का अर्थ है —
दिए गए स्वर से आधा सुर नीचे की काली कुंजी बजाना।
उदाहरण:
Db = D के बाईं ओर की काली कुंजी
Bb = B के बाईं ओर की काली कुंजी
🎼 महत्वपूर्ण बात
✔ C# और Db एक ही कुंजी है
✔ D# और Eb एक ही कुंजी है
✔ F# और Gb एक ही कुंजी है
✔ G# और Ab एक ही कुंजी है
✔ A# और Bb एक ही कुंजी है
अर्थात नाम अलग, पर स्वर एक ही।
🎶 भारतीय संगीत से संबंध
अंग्रेज़ी
भारतीय स्वर
C
सा
C# / Db
कोमल रे
D
रे
D# / Eb
कोमल ग
E
F
F# / Gb
तीव्र म
G
G# / Ab
कोमल ध
A
A# / Bb
कोमल नि
B
नि
📖 सरल शब्दों में
(Sharp) = आधा सुर ऊपर
♭ (Flat) = आधा सुर नीचे
दोनों काली कुंजियाँ दर्शाते हैं
E और B के बाद कोई काली कुंजी नहीं होती (इसलिए E# और B# सामान्यतः नहीं दिखते)
शुरुआती विद्यार्थियों के लिए निर्देश
पुस्तक में लिखा है कि —
जब आप अपना पहला भजन/गीत सीख रहे हों, तो ऐसा चुनें जिसमें कोई शार्प (#) या फ्लैट (♭) स्वर न हो।
उदाहरण के लिए “One Ohana Place” जैसे सरल गीत से शुरुआत करें।
जब आप सहज हो जाएँ, तब धीरे-धीरे शार्प और फ्लैट वाले जटिल भजनों की ओर बढ़ें।
👉 मतलब — पहले सरल स्वरों (सफेद कुंजियों) पर अभ्यास करें।
🎵 2️⃣ DRONES (ड्रोन स्वर) क्या हैं?
पुस्तक में “Drones” शीर्षक के अंतर्गत बताया गया है:
✔ ड्रोन स्वर क्या हैं?
ये वैकल्पिक (optional) स्वर होते हैं।
ये पूरे गीत के दौरान पृष्ठभूमि में बजाए जा सकते हैं।
ये मुख्य धुन (melody) के साथ गहराई और स्थिरता जोड़ते हैं।
✔ इन्हें कैसे दर्शाया जाता है?
चार्ट की शुरुआत में एक आयताकार बॉक्स (rectangular box) में दिखाया जाता है।
आमतौर पर इन्हें दाहिने हाथ के अंगूठे से बजाया जाता है।
बाकी उंगलियाँ मुख्य धुन बजाती हैं।
✔ क्या ये अनिवार्य हैं?
नहीं।
ये आवश्यक नहीं हैं, परंतु ध्वनि को समृद्ध (rich) बनाते हैं।
🎶 महत्वपूर्ण सावधानी
पुस्तक में लिखा है कि —
कभी-कभी ड्रोन स्वर पास-पास के स्वरों से टकरा सकते हैं।
उदाहरण दिया गया है कि “Door of My Heart” गीत में, यदि पहले ही ड्रोन बजा दिया जाए तो G और A का टकराव (clash) हो सकता है।
इसलिए कुछ स्थानों पर ड्रोन को थोड़ी देर बाद शुरू करना चाहिए।
👉 मतलब — ड्रोन बजाते समय ध्यान रखें कि वह मुख्य स्वर से टकराए नहीं।
🎼 सरल भाषा में समझें
ड्रोन = स्थिर पृष्ठभूमि स्वर
भारतीय संगीत में इसे आप “तानपुरे की निरंतर ध्वनि” जैसा समझ सकते हैं।
जैसे —
अगर सा पर गीत है, तो पृष्ठभूमि में “सा” या “सा-प” लगातार बजता रहे।
इससे भजन में गहराई और आध्यात्मिक भाव बढ़ता है।
🌼 सार
शुरुआत सरल स्वरों से करें।
शार्प और फ्लैट बाद में सीखें।
ड्रोन स्वर वैकल्पिक हैं, पर संगीत को गंभीरता और स्थिरता देते हैं।
गलत समय पर बजाने से स्वर टकरा सकते हैं।

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

हम जप (चैंटिंग) क्यों करते हैं

हम जप (चैंटिंग) क्यों करते हैं
भक्ति-पूर्ण जप आध्यात्मिक मार्ग पर चेतना के रूपांतरण के लिए सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है। यह हृदय को खोलकर और ग्रहणशीलता बढ़ाकर चेतना को परिवर्तित करता है। मंत्रों की सूक्ष्म कंपन वास्तव में हमारे मन में उत्पन्न होने वाले विचारों को बदल देती हैं और उन्हें ऊँचा उठाती हैं।
स्वामी क्रियानंद ने कहा है कि “चैंट सरल वाक्यों से बने होते हैं जिन्हें बार-बार दोहराया जाता है, और हर बार अधिक गहन एकाग्रता और भक्ति के साथ।” जैसे भवन और स्थान वहाँ आने-जाने वाले लोगों की चेतना के अनुसार कंपन विकसित कर लेते हैं, वैसे ही संगीत भी केवल वास्तविक ध्वनियों से परे सूक्ष्म कंपन उत्पन्न करता है। जिन चैंटों को महान संतों ने आध्यात्मिक शक्ति से ओत-प्रोत किया है, उनमें गाने वालों को प्रेरित करने की विशेष शक्ति होती है।
परमहंस योगानंद ने कहा, “चैंटिंग आधी लड़ाई है!” इस कथन से उनका आशय उस आंतरिक संघर्ष से था जिसका सामना प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अहंकारी प्रवृत्तियों पर विजय पाने और ईश्वर को पाने के लिए करना पड़ता है। चैंटिंग हमें सहज ही नकारात्मक भावनाओं और आत्म-चिंता के क्षेत्र से ऊपर उठा देती है। जब हम संगीत की आनंद और स्वतंत्रता में अपने छोटे अहं को भूल जाते हैं, तो हम ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति में स्वयं को अतिक्रमित कर जाते हैं।
यद्यपि हारमोनियम पारंपरिक वाद्ययंत्र है जिससे चैंट गाए जाते हैं, फिर भी इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड, पियानो या अन्य वाद्ययंत्र भी उपयोग किए जा सकते हैं। ब्रिटिश लोग मूल रूप से बेलोज़ ऑर्गन (फूँक से बजने वाला ऑर्गन) भारत लाए थे; भारतीयों ने इसे इस प्रकार अनुकूलित किया कि इसे जमीन पर बैठकर बजाया जा सके। तब से हारमोनियम भक्ति-जप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
हारमोनियम बजाना प्रारंभ करने के लिए संगीत का विशेष अनुभव आवश्यक नहीं है। इस पुस्तक में दिए गए मूल सिद्धांतों को सीखें और आप पाएँगे कि आपके लिए एक नया संसार खुल रहा है। आत्मा की दिव्य के प्रति स्वाभाविक लालसा चैंटिंग के माध्यम से पूर्ण अभिव्यक्ति पाती है, और हृदय का प्रेम ऊँचा उठता है। जैसा कि इस पुस्तक के एक चैंट में पूछा गया है: “यह कौन-सी चेतना है जो मेरे मस्तिष्क से प्रवाहित हो रही है? क्या यह दिव्य के अतिरिक्त कुछ और हो सकती है?”
आपकी चैंटिंग आपको महान भक्ति, प्रेरणा और शाश्वत आनंद से भर दे।
🔎 विस्तृत व्याख्या
अब इसे सरल और गहराई से समझते हैं—
1️⃣ जप का मनोवैज्ञानिक प्रभाव
बार-बार मंत्र दोहराने से मन की भटकन कम होती है।
नकारात्मक विचार धीरे-धीरे शांत होते हैं।
मन एक बिंदु पर टिकना सीखता है (एकाग्रता बढ़ती है)।
सकारात्मक भावनाएँ जागृत होती हैं।
आधुनिक मनोविज्ञान भी मानता है कि ध्वनि-दोहराव (sound repetition) मस्तिष्क की तरंगों (brain waves) को शांत अवस्था में ले जाता है।
2️⃣ “सूक्ष्म कंपन” का अर्थ क्या है?
लेख में कहा गया है कि मंत्र की सूक्ष्म कंपन विचारों को बदल देती है।
इसका अर्थ:
हर शब्द और ध्वनि ऊर्जा है।
संस्कृत मंत्र विशेष ध्वन्यात्मक शक्ति रखते हैं।
जब हम भक्ति से जप करते हैं तो केवल शब्द नहीं, भावना भी कंपन उत्पन्न करती है।
जैसे:
क्रोध भरे शब्द वातावरण को भारी बना देते हैं।
प्रेमपूर्ण शब्द वातावरण को हल्का कर देते हैं।
3️⃣ “चैंटिंग आधी लड़ाई है” — इसका गहरा अर्थ
यहाँ लड़ाई बाहरी नहीं, अहंकार से आंतरिक संघर्ष है।
मानव जीवन की मुख्य समस्याएँ:
मैं-भाव (ego)
भय
लोभ
चिंता
जब व्यक्ति जप में डूब जाता है:
वह स्वयं को भूल जाता है।
उसका ध्यान “मैं” से हटकर “ईश्वर” पर केंद्रित हो जाता है।
यही आध्यात्मिक प्रगति का बड़ा कदम है।
4️⃣ संगीत और भक्ति का संबंध
संगीत सीधे हृदय को छूता है।
इसलिए:
साधारण प्रार्थना मन से होती है।
लेकिन भक्ति-गीत हृदय से होते हैं।
जब हृदय खुलता है:
करुणा बढ़ती है।
शांति आती है।
प्रेम जागृत होता है।
5️⃣ हारमोनियम का उल्लेख क्यों?
लेख बताता है कि:
साधना के लिए जटिल संगीत शिक्षा आवश्यक नहीं।
साधारण व्यक्ति भी जप शुरू कर सकता है।
उद्देश्य संगीत-कला नहीं, भक्ति-भाव है।
6️⃣ आत्मा की स्वाभाविक लालसा
हर मनुष्य के भीतर:
शांति की खोज
प्रेम की खोज
अनंत आनंद की खोज
चैंटिंग उस आंतरिक प्यास को व्यक्त करने का माध्यम है।
🪔 निष्कर्ष (आध्यात्मिक सार)
यह पाठ हमें बताता है कि:
✔ जप केवल गाना नहीं है, चेतना परिवर्तन का साधन है।
✔ ध्वनि और भावना मिलकर आत्मा को ऊपर उठाती हैं।
✔ भक्ति-जप से अहंकार कमजोर होता है।
✔ नियमित चैंटिंग से मन, हृदय और चेतना शुद्ध होती है।
परिचय (Introduction)
इस पुस्तक का प्रारूप इस प्रकार बनाया गया है कि इसका उपयोग प्रारंभिक (Beginner) और उन्नत (Advanced) – दोनों प्रकार के गायक/जाप करने वाले कर सकें।
स्वर पढ़ना (Reading Notes)
जो लोग स्वर पढ़ना नए हैं, उनके लिए प्रत्येक शब्द के ऊपर उस स्वर (एक या अधिक) का नाम लिखा गया है जो हार्मोनियम पर उस शब्द के अनुरूप बजाया जाता है। उदाहरण:
G A C D D F F E D C D A
"Door of my heart, open wide I keep for Thee."
(अर्थात – “मेरे हृदय का द्वार, तेरे लिए खुला रहता है।”)
हार्मोनियम पर प्रत्येक स्वर की स्थिति आसानी से सीखने के लिए आप की-बोर्ड पर स्वरों के अक्षर लिख सकते हैं। इसके लिए छोटे गोल लेबल या स्टिकी नोट्स का उपयोग करें और उन्हें काली कुंजियों के बीच इस प्रकार लगाएँ कि वे आपकी उँगलियों से ढके नहीं जाएँ।
इसके बाद कोई पसंदीदा या परिचित भजन चुनें जिसे आप सीखना चाहते हैं। यदि आपके पास उसका रिकॉर्डिंग हो तो उसे कई बार सुनें ताकि उसकी धुन और लय का अनुभव हो सके। ऊपर लिखे स्वरों की सहायता से प्रत्येक भजन को धीरे-धीरे, एक-एक स्वर पकड़कर बजाना प्रारंभ करें।
फिर बहुत धीरे-धीरे और लय में अभ्यास करें। अंत में भजन को बार-बार बजाएँ जब तक कि वह आपको याद न हो जाए। बीच-बीच में रिकॉर्डिंग सुनकर अपनी प्रस्तुति की गुणवत्ता सुधारें।
संगीत लिपि पढ़ना (Reading Musical Notation)
यदि आप संगीत की औपचारिक लिपि (Musical Notation) पढ़ना सीखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चित्र की सहायता से समझ सकते हैं कि कौन-सा अक्षर-स्वर किस संगीत-स्वर से मेल खाता है और वह हार्मोनियम के की-बोर्ड पर कहाँ स्थित है।
इसके अतिरिक्त, इंटरनेट पर अनेक निःशुल्क वेबसाइटें उपलब्ध हैं जहाँ आप अपनी संगीत-पढ़ने की क्षमता को सीख सकते हैं या निखार सकते हैं।
📘 अब विस्तार से समझें
1️⃣ यह पुस्तक किसके लिए है?
यह पुस्तक दो स्तरों के साधकों के लिए है:
शुरुआती (Beginner) – जिन्हें स्वर पढ़ना नहीं आता।
उन्नत (Advanced) – जिन्हें पहले से संगीत का ज्ञान है।
2️⃣ स्वर (Notes) पढ़ने की पद्धति
यहाँ अंग्रेज़ी के अक्षर (A, B, C, D, E, F, G) का प्रयोग हुआ है।
भारतीय संगीत में इनका समकक्ष इस प्रकार है:
English Note
भारतीय स्वर
C
सा
D
रे
E
F
G
A
B
नि
उदाहरण में दिए गए अक्षर: G A C D D F F E D C D A
यदि C = सा मानें, तो यह क्रम भारतीय स्वरों में होगा: प ध सा रे रे म म ग रे सा रे ध
अर्थात गीत के प्रत्येक शब्द के ऊपर उसका संबंधित स्वर लिखा गया है।
3️⃣ हार्मोनियम सीखने की विधि
पुस्तक में जो तरीका बताया गया है, वह अत्यंत व्यावहारिक है:
✔ पहला चरण
की-बोर्ड पर छोटे लेबल लगाकर प्रत्येक कुंजी पर उसका नाम लिख लें।
✔ दूसरा चरण
रिकॉर्डिंग को बार-बार सुनें — इससे:
धुन (Melody) समझ में आएगी।
लय (Rhythm) समझ में आएगी।
✔ तीसरा चरण
एक-एक स्वर पकड़कर बजाएँ।
जल्दी न करें।
लय में अभ्यास करें।
✔ चौथा चरण
बार-बार अभ्यास।
बीच-बीच में रिकॉर्डिंग से तुलना।
4️⃣ संगीत लिपि (Musical Notation) क्यों सीखें?
यदि आप केवल अक्षरों के सहारे बजाते हैं तो आप सीमित रहेंगे।
लेकिन यदि आप स्टाफ नोटेशन (Staff Notation) पढ़ना सीख लेते हैं तो:
किसी भी पश्चिमी संगीत को पढ़ सकते हैं।
स्वयं नई धुनें समझ सकते हैं।
हार्मोनियम, पियानो आदि में दक्षता बढ़ती है।
5️⃣ पुस्तक का मूल संदेश
यह पुस्तक कहती है:
“धीरे सीखो, सुनो, अभ्यास करो, और फिर उसे आत्मसात कर लो।”
संगीत में सबसे महत्वपूर्ण है:
धैर्य
नियमित अभ्यास
सुनने की क्षमता
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हार्मोनियम के स्वरों का सरल चित्र
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हार्मोनियम की सफेद कुंजियाँ (Keys)

| F | G | A | B | C | D | E | F | G | A | B | C | D | E |

भारतीय स्वर (सर्गम)

  सा रे ग म प ध नि सा रे ग म प ध नि
   C D E F G A B C D E F G A B
🎼 म्यूज़िक स्टाफ (पाँच रेखाएँ) पर स्वर
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● ← उच्च सा (C)
   -----
      ● ← नि (B)
   -----
      ● ← ध (A)
   -----
      ● ← प (G)
   -----
      ● ← म (F)
   -----
      ● ← ग (E)
   -----
      ● ← रे (D)
   -----
      ● ← सा (C)
(ऊपर जाते हुए स्वर ऊँचे होते जाते हैं)
📖 हिंदी में व्याख्या
यह चित्र बताता है कि —
हार्मोनियम में कुल 12 स्वर होते हैं (7 शुद्ध + 5 काले स्वर/कोमल-तीव्र)।
सफेद कुंजियाँ (White Keys) शुद्ध स्वर दर्शाती हैं —
C = सा
D = रे
E = ग
F = म
G = प
A = ध
B = नि
इसके बाद फिर से C आता है, जो ऊँचा "सा" कहलाता है।
म्यूज़िक स्टाफ (पाँच रेखाओं वाली पद्धति) में:
नीचे की ओर स्वर नीचा (मंद्र) होता है।
ऊपर की ओर स्वर ऊँचा (तार) होता है।
प्रत्येक रेखा और रेखाओं के बीच का स्थान एक स्वर को दर्शाता है।
चित्र में तीर (→) यह दिखा रहे हैं कि कौन-सा की (Key) स्टाफ पर किस स्थान से संबंधित है।
🎶 मुख्य बात
हार्मोनियम की कुंजियाँ और संगीत की पाँच रेखाएँ एक ही स्वर को अलग-अलग पद्धति में दर्शाती हैं:
अंग्रेज़ी पद्धति → C, D, E, F, G, A, B
भारतीय पद्धति → सा, रे, ग, म, प, ध, नि
दोनों का क्रम समान है, केवल नाम अलग हैं।

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं।

🚩*शायद ही कुछ गिने चुने हिंदुओं को पता होगा....*
*काशी में मणिकर्णिका घाट पर चिता जब शांत हो जाती है तब मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति चिता भस्म पर 94 लिखता है....।*

*यह सभी को नहीं मालूम है।*

*खांटी बनारसी लोग या अगल बगल के लोग ही इस परम्परा को जानते हैं। बाहर से आये शवदाहक जन इस बात को नहीं जानते।*

*जीवन के शतपथ होते हैं।*

*100 शुभ कर्मों को करने वाला व्यक्ति मरने के बाद उसी के आधार पर अगला जीवन शुभ या अशुभ प्राप्त करता है।*

*94 कर्म मनुष्य के अधीन हैं। वह इन्हें करने में समर्थ है पर 6 कर्म का परिणाम ब्रह्मा जी के अधीन होता है।*

*हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश- अपयश ये 6 कर्म विधि के नियंत्रण में होते हैं।*

*अतः आज चिता के साथ ही तुम्हारे 94 कर्म भस्म हो गये।*

*आगे के 6 कर्म अब तुम्हारे लिए नया जीवन सृजित करेंगे।*

*अतः 100 - 6 = 94 लिखा जाता है।*

*गीता में भी प्रतिपादित है कि मृत्यु के बाद मन अपने साथ 5 ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता है।*

*यह संख्या 6 होती है। मन और पांच ज्ञान इन्द्रियाँ।*

*अगला जन्म किस देश में कहाँ और किन लोगों के बीच होगा यह प्रकृति के अतिरिक्त किसी को ज्ञात नहीं होता है।*

*अतः 94 कर्म भस्म हुए 6 साथ जा रहे हैं।*

*विदा यात्री।*

*तुम्हारे 6 कर्म तुम्हारे साथ हैं।*

*आपके लिए इन 100 शुभ कर्मों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है जो जीवन को धर्म और सत्कर्म की ओर ले जाते हैं एवं यह सूची आपके जीवन को सत्कर्म करने की प्रेरणा देगी......*

*100 शुभ कर्मों की गणना धर्म और नैतिकता के कर्म-*

1.सत्य बोलना

2.अहिंसा का पालन

3.चोरी न करना

4.लोभ से बचना

5.क्रोध पर नियंत्रण

6.क्षमा करना

7.दया भाव रखना

8.दूसरों की सहायता करना

9.दान देना (अन्न, वस्त्र, धन)

10.गुरु की सेवा

11.माता-पिता का सम्मान

12.अतिथि सत्कार

13.धर्मग्रंथों का अध्ययन

14.वेदों और शास्त्रों का पाठ

15.तीर्थ यात्रा करना

16.यज्ञ और हवन करना

17.मंदिर में पूजा-अर्चना

18.पवित्र नदियों में स्नान

19.संयम और ब्रह्मचर्य 9का पालन

20.नियमित ध्यान और योग सामाजिक और पारिवारिक कर्म

21.परिवार का पालन-पोषण

22.बच्चों को अच्छी शिक्षा देना

23.गरीबों को भोजन देना

24.रोगियों की सेवा

25.अनाथों की सहायता

26.वृद्धों का सम्मान

27.समाज में शांति स्थापना

28.झूठे वाद-विवाद से बचना

29.दूसरों की निंदा न करना

30.सत्य और न्याय का समर्थन

31.परोपकार करना

32.सामाजिक कार्यों में भाग लेना

33.पर्यावरण की रक्षा

34.वृक्षारोपण करना

35.जल संरक्षण

36.पशु-पक्षियों की रक्षा

37.सामाजिक एकता को बढ़ावा देना

38.दूसरों को प्रेरित करना

39.समाज में कमजोर वर्गों का उत्थान

40.धर्म के प्रचार में सहयोग आध्यात्मिक और व्यक्तिगत कर्म

41.नियमित जप करना

42.भगवान का स्मरण

43.प्राणायाम करना

44.आत्मचिंतन

45.मन की शुद्धि

46.इंद्रियों पर नियंत्रण

47.लालच से मुक्ति

48.मोह-माया से दूरी

49.सादा जीवन जीना

50.स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)

51.संतों का सान्निध्य

52.सत्संग में भाग लेना

53.भक्ति में लीन होना

54.कर्मफल भगवान को समर्पित करना

55.तृष्णा का त्याग

56.ईर्ष्या से बचना

57.शांति का प्रसार

58.आत्मविश्वास बनाए रखना

59.दूसरों के प्रति उदारता

60.सकारात्मक सोच रखना सेवा और दान के कर्म

61.भूखों को भोजन देना

62.नग्न को वस्त्र देना

63.बेघर को आश्रय देना

64.शिक्षा के लिए दान

65.चिकित्सा के लिए सहायता

66.धार्मिक स्थानों का निर्माण

67.गौ सेवा

68.पशुओं को चारा देना

69.जलाशयों की सफाई

70.रास्तों का निर्माण

71.यात्री निवास बनवाना

72.स्कूलों को सहायता

73.पुस्तकालय स्थापना

74.धार्मिक उत्सवों में सहयोग

75.गरीबों के लिए निःशुल्क भोजन

76.वस्त्र दान

77.औषधि दान

78.विद्या दान

79.कन्या दान

80.भूमि दान, नैतिक और मानवीय कर्म

81.विश्वासघात न करना

82.वचन का पालन

83.कर्तव्यनिष्ठा

84.समय की प्रतिबद्धता

85.धैर्य रखना

86.दूसरों की भावनाओं का सम्मान

87.सत्य के लिए संघर्ष

88.अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना

89.दुखियों के आँसू पोंछना

90.बच्चों को नैतिक शिक्षा

91.प्रकृति के प्रति कृतज्ञता

92.दूसरों को प्रोत्साहन

93.मन, वचन, कर्म से शुद्धता

94.जीवन में संतुलन बनाए रखना

*विधि के अधीन 6 कर्म*

95.हानि

96.लाभ

97.जीवन

98.मरण

99.यश

100.अपयश
 
जय श्री हरि 🌸👏

मंगलवार, 13 जनवरी 2026

वामपंथी इतिहासकारों ने गलत इतिहास पढ़ाया

इतिहास गवाह है की कभी भी चाहे वो हिन्दु राजा हो या हिन्दू रानी मुस्लिम समुदाय से शादी करके कभी खुश नही रहे,,,,,

वामपंथी इतिहासकारों ने गलत इतिहास पढ़ाया हमे,,,,

👉महाराणा सांगा ने मुस्लिम सेनापति की बेटी मेरूनिसा तथा अन्य तीन मुस्लिम लड़कियों से शादी की,,,,,

👉अकबर की बेटी शहज़ादी खानूम से महाराजा अमर सिंह जी ने शादी की,,,,,

👉विजय नगर के सम्राट कृष्ण देव राय ने गुजरात के नवाब      सुल्तान महमूद शाह की बेटी मिहिरिमा सुल्ताना से शादी की,,,,

👉कुँवर जगत सिंह ने उड़ीसा के अफगान नवाब कुतुल खा कि बेटी मरियम से शादी की,,,,,

👉महाराणा कुंभा (अपराजित योद्धा) ने जागीरदार वजीर खा की बेटी से शाली की,,,,,,

👉विक्रम जीत सिंह गौतम ने आजमगढ़ की मुस्लिम लड़की से शादी की,,,,

👉बप्पा रावल (फादर ऑफ रावलपिंडी) गजनी के मुस्लिम शासक की पुत्री तथा अन्य 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारियो से शादी की,,,,,

👉कश्मीर के राजा सम्राट ललितादित्य मुक्तपीड़ का तुर्की के खलीफा मुहम्मद बिन कासिम की बेटी जैनम तथा अन्य 8 मुस्लिम लड़कियों से शादी की,,,,

👉जोधपुर के राजा राजा हनुमंत सिंह ने मुस्लिम लड़की ज़ुबेदा से शादी की,,,,

👉राजा मान सिंह ने मुस्लिम लड़की लाला बाई से शादी की,,,,,

👉महाराणा उदय सिंह ने एक मुस्लिम लड़की लाला बाई से शादी की,,,,,

👉राजा छत्रसाल ने हैदराबाद के निजाम की बेटी रूहानी बाई से शादी की,,,,,

👉अमरकोट के राजा वीरसाल ने हामिदा बानो से शादी की,,,

👉राजपूत राजा बिन्दुसार ने मीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन से शादी की,,,,,

ये तो हो गई वैवाहिक संबंध की बात,,,,,
लेकिन बहुत सारे हिंदू राजाओ की मुस्लिम प्रेमिकाएं भी थी उनके बारे मे भी जान लीजिए,,,,

👉इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्ताना जो राजपूत राजा जागीरदार कर्मचन्द्र से प्रेम करती थी,,,,,

👉अल्लाउदीन खिलजी की बेटी "फिरोजा" जो जालोर के राजकुमार विरमदेव की दीवानी थी वीरमदेव की युद्ध मै वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा जलकर सती हो गयी थी,,,,,

👉औरंगजेब की बहन छत्रपति शिवा जी की दिवानी थी और छुपकर उनसे मिलने भी जाती थी,,,,

👉औरंगजेब की एक बेटी जेबुनिशा जो कुँवर छत्रसाल की दीवानी थी तथा प्रेम पत्र लिखा करती थी और छत्रसाल के अलावा किसी ओर से शादी करने से उसने इंकार कर दिया था,,,,,

👉औरंगजेब की पोती ओर मोहम्मद अकबर की बेटी सफियत्नीशा जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम की दीवानी थी,,

हिन्दू राजाओ की और भी बहुत सी मुस्लिम पत्नियां थी लेकिन वो किसी राज परिवार से नहीं थी,,,,,,

लेकिन उस समय की किताबो में और उस समय के कवियों के रचनाओ में इसका जिक्र स्पष्ट है,,,,,

और ब्रिटिश रिकॉर्ड में भी ज्यादातर हिन्दू राजाओ की एक से ज्यादा मुस्लिम बीवीया थी,, लेकिन रक्त शुध्दता की वजह से इनके बच्चो को अपनाया नहीं जाता ओर उन बच्चों को वर्णशंकर मान के अलग जागीर दे दी जाती थी,,,,,

तो ये ऐतिहासिक तथ्य जूते की तरह फेंक कर उनके मुह पर जरूर मारिए जो हिन्दुओ को झूठे जोधा अकबर जैसे ऐतिहासिक तथ्यों पर बहसबाजी करते है,,,,

इन पर भी एक फिल्म जरूर बननी चाहिए,,,
क्या आप सहमत है,,,,

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